संक्षिप्त इतिहास
क्षेत्र में बढ़ती जन जागृति एवं शैक्षिक प्रसार हेतु शिक्षा प्रेमी डॉक्टर सत्यवीर गंगवार जी ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम पर स्वामी दयानंद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नवीन दीप को प्रज्वलित किया, वर्ष 2000 में हाईस्कूल व 2003 इंटरमीडिएट की मान्यता विज्ञान वर्ग से प्राप्त हुई विद्यालय के अच्छे शिक्षण व अनुशासित वातावरण के कारण माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है |
विद्यालय में छात्र-छात्राओं के अध्यन की उचित व्यवस्था है | तथा खेल का मैदान स्वच्छ वातावरण ,विषय से संबंधित नवीनतम पुस्तकें पुस्तकालय में उपलब्ध है | विद्यालय में प्रोजेक्टर रूम की सुविधा भी उपलब्ध है |
तथा क्रीडा के छेत्र में छात्र / छात्राये प्रति वर्ष प्रतिभा दिखाकर विद्यालय का नाम उजवल करते है | परीक्षा फल की द्रष्टि से विद्यालय जनपद में महत्पूर्ण स्थान रखता है | विधार्थी जीवन मानव जीवन का स्वर्णकाल माना जाता है | आज के विधार्थी ही कल के राष्ट्र निर्माता है | हमारा राष्ट्र तब ही उन्नति शील बन सकता है जब उसके नागरिक स्वस्थ शिक्षिक एवं सम्रध हो |
सुविधाएं
पुस्तकालय की व्यवस्था, सीसीटीवी युक्त कक्षाएं , जनरेटर की सुविधा , नियमित कक्षाएं, खेलकूद के लिए मैदान ,शुद्ध पेयजल की व्यवस्था ,छात्रवृत्ति (शासनादेश अनुसार) ,प्रोजेक्टर रूम स्वच्छ शौचालय , एवं फर्नीचर की पर्याप्त व्यवस्था आदि |